कहाँ किसी को कदर होती है सच्चे प्यार की
कहाँ किसी को कदर होती है सच्चे प्यार की
रद्दी मे पड़े किसी कागज के अख़बार की
यूँ तो जलाया बहुत जाता है इश्क़ मे उसे
तपती ज्येठ मे कहाँ होती है मौसम बहार की..
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यूँ तो जलाया बहुत जाता है इश्क़ मे उसे
तपती ज्येठ मे कहाँ होती है मौसम बहार की..