Poem

थका हुआ

17 Aug 2026

थक हार कर, हर किसी रात पर
जब तुम बिस्तर पर सोते हो..

थक हार कर, हर किसी रात पर
जब तुम बिस्तर पर सोते हो..
लगता है दुनिया की चकाचौध से परे
कोई हो जो समझ सके तुमको
दिनभर की बातें उससे हो..

वो सुने तुम्हे तुम्हारी बातें प्यारी लगे
उसे उस इश्क में खुमारी लगे
शिकायतों से परे उस मुहाने खड़े..
मोहब्बत में वो खुद्दारी लगे
समझ सके तुम्हारे फीलिंग्स को वो
अंत में रिश्तों में ये समझदारी लगे..

थक हार कर हर किसी रात पर
जब तुम बिस्तर पर सोते हो...


- आशुतोष
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